विकलांगों के अन्तर्राष्ट्रीय दिवस पर आनलाइन कार्यक्रम आयोजित

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अलीगढ़, 4 दिसंबरः विकलांग व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए सामाजिक, आर्थिक और कानूनी बाधाओं को दूर करने और दृष्टिकोण में बदलाव लाने की जरूरत है। यह विचार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने विकलांगो के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर एएमयू की डिस्ऐबिलिटी यूनिट द्वारा आयोजित एक आनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विकलांग व्यक्ति हमारे समाज में सबसे बहिष्कृत समूहों में से एक हैं और वह कोविड-19 जैसे संकट के दौरान और भी अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि एएमयू विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
श्री फैज़ अहमद किदवई (आईएएस) ने विकलांग व्यक्तियों के कल्याण के लिए विभिन्न नीतिगत मुद्दों, सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों पर प्रकाश डाला।
श्री साजिद जिया खान (कार्पाेरेट वक्ता और उपाध्यक्ष, रणनीति और विकास, सीआरएच) ने विकलांग व्यक्तियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और विकलांग व्यक्तियों के मानवाधिकारों को प्राप्त करने के लिए असमानताओं को समाप्त करने का आह्वान किया।
डा फर्रुख हफीज ने स्वागत भाषण दिया जबकि वीमेन्स कालिज की डा शगुफ्ता नियाज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर छात्रों को हेडफोन और पेन ड्राइव बांटे गए। कार्यक्रम का संचालन गयासुद्दीन ने किया।

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